ट्रैक्टर सब्सिडी योजनाएं 2026: असल में क्या मिलता है
Aglist Editorial · प्रकाशित 13 Aug 2026 · आखिरी अपडेट 24 Sep 2026
पीएम किसान ट्रैक्टर योजना नाम की कोई योजना है ही नहीं। जो असल में है वह एसएमएएम है, जो अब पीएम-आरकेवीवाई के तहत चलती है, साथ में सीआरएम योजना और राज्यों के पोर्टल। यहां असली दरें, पात्रता और यह सच भी कि ज्यादातर आवेदकों को कुछ नहीं मिलता।
पहले वह बात जो कोई और नहीं बताएगा। पीएम किसान ट्रैक्टर योजना नाम की कोई केंद्रीय योजना है ही नहीं। न कभी थी, और कई फैक्ट-चेकर इसे झूठा साबित कर चुके हैं, जिसमें Rs 5 लाख सब्सिडी वाला वायरल दावा भी शामिल है। इससे बुरा यह कि इसी नाम से फर्जी साइटें किसानों की जानकारी और आवेदन शुल्क वसूलती हैं। कोई असली सरकारी पोर्टल आवेदन शुल्क नहीं लेता। कोई पैसे मांगे तो वह ठगी है।
एसएमएएम, और अब इसे क्या कहते हैं
ट्रैक्टर सब्सिडी का मुख्य केंद्रीय रास्ता कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (एसएमएएम) है। एक बदलाव लगभग कोई प्रतिस्पर्धी पेज नहीं बताता। 3 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि मंत्रालय की योजनाओं को दो छातों में समेट दिया, और कृषि यंत्रीकरण अब अलग मिशन नहीं, पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) का घटक है। कुल प्रस्तावित खर्च Rs 1,01,321.61 करोड़, केंद्रीय हिस्सा Rs 69,088.98 करोड़।
नाम एसएमएएम बना हुआ है और आवेदन अब भी agrimachinery.nic.in पर होते हैं। फर्क यह कि 2025-26 से फंडिंग पीएम-आरकेवीवाई के तहत है और राज्यों को छाते के भीतर पैसा इधर-उधर करने की ज्यादा छूट है। इसलिए "कितनी सब्सिडी मिलेगी" का जवाब अब आपके राज्य की सालाना कार्ययोजना पर ज्यादा निर्भर है।
दरें
प्रतिशत स्थिर रहे हैं और मंत्रालय ने जुलाई 2025 में इनकी पुष्टि की: सामान्य श्रेणी के किसानों को मशीन लागत का 40%, और अनुसूचित जाति/जनजाति, लघु एवं सीमांत किसान, महिला किसान तथा पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को 50%। दोनों पर प्रति मशीन सीमा लगती है:
- 2WD ट्रैक्टर, 8-20 पीटीओ एचपी: 50% में Rs 2.00 लाख / 40% में Rs 1.60 लाख
- 4WD ट्रैक्टर, 8-20 पीटीओ एचपी: 50% में Rs 2.25 लाख / 40% में Rs 1.80 लाख
- 2WD ट्रैक्टर, 20-40 पीटीओ एचपी: 50% में Rs 2.50 लाख / 40% में Rs 2.00 लाख
- 4WD ट्रैक्टर, 20-40 पीटीओ एचपी: 50% में Rs 3.00 लाख / 40% में Rs 2.40 लाख
- 2WD ट्रैक्टर, 40 से ऊपर 70 पीटीओ एचपी तक: 50% में Rs 4.25 लाख / 40% में Rs 3.40 लाख
- 4WD ट्रैक्टर, 40 से ऊपर 70 पीटीओ एचपी तक: 50% में Rs 5.00 लाख / 40% में Rs 4.00 लाख
- पावर टिलर 8 बीएचपी से कम: 50% में Rs 0.65 लाख / 40% में Rs 0.50 लाख
- पावर टिलर 8 बीएचपी और ऊपर: 50% में Rs 0.85 लाख / 40% में Rs 0.70 लाख
चेतावनी पढ़े बिना इन पर योजना मत बनाइए। यह तालिका 2018-19 में संशोधित दिशानिर्देशों से है, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सबसे विस्तृत आधिकारिक संस्करण है। 2024 और 2025 में नए दिशानिर्देश आए हैं और सीमाएं बदल सकती हैं। 40% और 50% पक्के हैं; रुपये की सीमाओं को संकेत मानिए और राज्य कृषि विभाग से पक्का कीजिए।
बैंड पीटीओ एचपी से तय होते हैं, इंजन एचपी से नहीं। महिंद्रा 575 DI XP प्लस 47 इंजन एचपी पर 42 पीटीओ एचपी देता है, स्वराज 963 FE 60 पर 53.6। यह फर्क क्यों मायने रखता है, हमारी एचपी गाइड में है।
वह आंकड़ा जिसे आगे नहीं रखना चाहिए
"Rs 5 लाख तक ट्रैक्टर सब्सिडी" हर जगह लिखा मिलेगा। यह सिर्फ 40 से ऊपर 70 पीटीओ एचपी तक के 4WD ट्रैक्टर पर, आरक्षित श्रेणी के किसान को, 50% पर लागू है, और तभी जब आवेदन चुना जाए। यह तालिका का सबसे ऊपरी कोना है, आम नतीजा नहीं। मुख्यधारा के 41-50 एचपी ट्रैक्टर पर सामान्य श्रेणी की सीमा करीब Rs 2.00-2.40 लाख बैठती है।
असली फैसला यहां होता है: आवंटन
असली अड़चन प्रतिशत या सीमा नहीं, सालाना आवंटन है। लगभग हर राज्य में मांग उपलब्ध पैसे से कहीं ज्यादा है, आवेदन मौसमी खिड़कियों में खुलते हैं, और चयन लॉटरी से होता है। बहुत से आवेदकों को उस साल कुछ नहीं मिलता। खरीद की योजना यह मानकर बनाइए कि सब्सिडी नहीं मिलेगी, और मिल जाए तो बोनस समझिए।
सीआरएम: बेहतर फंडिंग वाली योजना
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली में क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट अक्सर ज्यादा काम का दरवाजा है। मध्य प्रदेश मार्च 2024 के संशोधित दिशानिर्देशों में जुड़ा।
- व्यक्तिगत किसान: 50%, या अधिकतम स्वीकार्य सब्सिडी, जो कम हो
- सीएचसी, एफपीओ, सहकारी समिति, पंचायत: 80% इन-सीटू पराली औजारों पर, बाकी मशीनरी पर 40%
- सीएचसी के लिए 60 एचपी और ऊपर के ट्रैक्टर पर 80%, जो 2024 में जुड़ा। अब सीएचसी को मशीन और उसे खींचने वाला ट्रैक्टर, दोनों मिल सकते हैं
पात्र मशीनों में हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर, सुपर एसएमएस, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, जीरो टिल ड्रिल, रोटावेटर और बेलर हैं। जून 2026 में केंद्र ने 2026-27 के लिए Rs 544.15 करोड़ का प्रावधान किया, लक्ष्य 46,000 से ज्यादा मशीनें।
एक बदलाव लोगों को चौंकाता है। 2024 से सीआरएम सहायता क्रेडिट-लिंक्ड और बैक-एंडेड है: आप कर्ज लेकर मशीन खरीदते हैं और सरकार सत्यापन के बाद सब्सिडी सीधे कर्जदाता को देती है। इससे कर्ज घटता है, डाउन पेमेंट नहीं। नकदी पर असर हमारी ट्रैक्टर लोन और ईएमआई गाइड में समझाया है।
सीएचसी और फार्म मशीनरी बैंक
किराए पर चलाने के लिए ट्रैक्टर लेने वालों का रास्ता यही है। 2024-25 तक 26,662 सीएचसी बन चुके हैं। परियोजना लागत Rs 10 लाख से Rs 75 लाख तक, और सीआरएम में इन-सीटू मशीनरी परियोजना का कम से कम 35%। गांव स्तर का फार्म मशीनरी बैंक Rs 10 लाख तक की परियोजना पर 80% सहायता का पात्र है। एसएमएएम ने 2014-15 से 2025-26 के बीच 21.61 लाख मशीनें दी हैं, यानी योजना कागजी नहीं है।
आवेदन कैसे करें
agrimachinery.nic.in पर किसान, समिति या उद्यमी के रूप में पंजीकरण कीजिए और आधार, जमीन तथा बैंक की सही जानकारी भरिए, क्योंकि यहीं की गड़बड़ी आवेदन खारिज होने की सबसे आम वजह है। जमीन के कागज, श्रेणी प्रमाणपत्र और बैंक विवरण अपलोड कीजिए और राज्य की घोषित खिड़की में आवेदन कीजिए। चयन के बाद सूचीबद्ध डीलर से तय अवधि में खरीद कीजिए, बिल और डिलीवरी प्रमाणपत्र अपलोड कीजिए, और भुगतान भौतिक सत्यापन के बाद डीबीटी से आता है, आमतौर पर 30 से 60 दिन में। आवंटन का कम से कम 30% महिला किसानों के लिए आरक्षित है, और शर्त यह भी है कि किसी और केंद्रीय योजना से वैसी सब्सिडी पहले न ली हो।
राज्यों के पोर्टल
मध्य प्रदेश: dbt.mpdage.org पर ई-कृषि यंत्र अनुदान, बताई गई दरें सामान्य किसानों को 40% और Rs 1.5 लाख तक, आरक्षित श्रेणी को 50% और Rs 2 लाख तक, चयन लॉटरी से। ये आंकड़े विभाग के बजाय एक एग्रीगेटर से हैं, पोर्टल पर जांच लीजिए। पंजाब: agrimachinerypb.com, 2026 की खिड़की 24 अप्रैल 2026 को बंद हुई। हरियाणा: agriharyana.gov.in और राज्य सीआरएम पोर्टल; सीआरएम दरें प्रमाणित हैं, "50% हरियाणा ट्रैक्टर सब्सिडी" नहीं। गुजरात: ikhedut.gujarat.gov.in सही चैनल है, पर 25-50% वाले आंकड़े प्रमाणित नहीं। महाराष्ट्र: mahadbt.maharashtra.gov.in। राजस्थान: rajkisan.rajasthan.gov.in। उत्तर प्रदेश: राज्य कृषि विभाग का किसान पोर्टल, और यूपी सीआरएम राज्य है।
बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड अपने-अपने पोर्टल से एसएमएएम चलाते हैं और राज्य टॉप-अप हर साल बदलता है। इन नौ राज्यों की दरें हमने प्रमाणित नहीं की हैं, इसलिए नहीं छापेंगे।
दो दावे नजरअंदाज कीजिए। नाबार्ड 30% ट्रैक्टर सब्सिडी नहीं देता, वह बैंकों को पुनर्वित्त देता है। और कोई पोर्टल आवेदन शुल्क नहीं लेता।
आवेदन से पहले अपने राज्य की असली ऑन-रोड लागत हमारी आरटीओ और रजिस्ट्रेशन गाइड में देख लीजिए। सीएचसी के लिए 51-60 एचपी देख रहे हों तो फार्मट्रैक 60 पॉवरमैक्स 4WD, और तालिका के छोटे सिरे के लिए पावर टिलर रेंज देखिए।