Shaktiman Regular Plus Series (RP 185 / 6 ft)
₹ 0.93 लाख – ₹ 1.25 लाख एक्स-शोरूम
जो यंत्र आपके ट्रैक्टर से मेल नहीं खाता, उसमें पैसा दो बार जलता है — एक बार खरीदते वक्त, और फिर हर बार चलाते वक्त डीज़ल और क्लच में। यहाँ हर इम्प्लीमेंट के साथ ज़रूरी एचपी लिखी है, और सबसे पहले वही पढ़नी चाहिए। 50 से 65 एचपी वाला 6 फुट रोटावेटर 42 एचपी ट्रैक्टर के पीछे ठीक से नहीं चलेगा, दुकानदार चाहे कुछ भी कहे। नीचे की रेंज ₹21,000 के 9 टाइन कल्टीवेटर से ₹8.83 लाख के डिस्क हैरो तक है — जुताई, बुआई, पराली प्रबंधन, छिड़काव, रोपाई और ढुलाई सब शामिल। ट्रैक्टर की लिफ्ट क्षमता भी देख लें।
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₹ 0.93 लाख – ₹ 1.25 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.17 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.2 लाख एक्स-शोरूम
₹ 0.21 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.53 लाख – ₹ 8.83 लाख एक्स-शोरूम
₹ 0.32 लाख – ₹ 0.47 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.83 लाख – ₹ 2.83 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.95 लाख – ₹ 2.82 लाख एक्स-शोरूम
₹ 0.68 लाख – ₹ 1.39 लाख एक्स-शोरूम
₹ 3.76 लाख – ₹ 4.53 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.58 लाख – ₹ 2.53 लाख एक्स-शोरूम
₹ 2.5 लाख – ₹ 3.24 लाख एक्स-शोरूम
₹ 1.58 लाख – ₹ 2.16 लाख एक्स-शोरूम
₹ 4 लाख – ₹ 5.5 लाख एक्स-शोरूम
₹ 3.25 लाख – ₹ 3.68 लाख एक्स-शोरूम
₹ 2.1 लाख – ₹ 2.7 लाख एक्स-शोरूम
हर माउंटेड यंत्र की दो ज़रूरतें होती हैं — उसे चलाने लायक पीटीओ पावर, और सिरे पर उठाने लायक हाइड्रोलिक लिफ्ट। खरीदार आमतौर पर पहली देखते हैं और दूसरी भूल जाते हैं, फिर रोटरी टिलर के बोझ से लिंकेज झुकती है।
यहाँ मौजूद उत्पादों से मोटा नियम। मास्चियो गैसपार्डो विराट प्लस 165 जैसे 5 फुट रोटावेटर को 40 से 45 एचपी चाहिए। 6 फुट रोटावेटर — शक्तिमान RP 185 या फील्डकिंग FKRTSG 175 — को बनावट के हिसाब से 45 से 65 एचपी। दो-बॉटम एमबी हल को 45 से 60 एचपी। 7 फुट डिस्क हैरो को 60 से 70 एचपी। 5 टन हाइड्रोलिक ट्रॉली को 50 से 70 एचपी। लगभग 10 फुट चौड़े लेज़र लैंड लेवलर को 90 से 105 एचपी, जो किसी अकेले किसान के पास शायद ही होता है।
चूँकि भारत के करीब 98% ट्रैक्टर 50 एचपी से नीचे हैं और दो-तिहाई 41 से 50 एचपी में हैं, ज़्यादातर खरीदारों को 5 से 6 फुट की जुताई रेंज में ही देखना चाहिए, और 65 एचपी से ऊपर माँगने वाली हर चीज़ को ठेकेदार का औज़ार मानना चाहिए।
एमबी हल मिट्टी पलटता है, अवशेष दबाता है और सख्त तह तोड़ता है। यह सीज़न में एक बार की गहरी जुताई का औज़ार है, बार-बार चलाने का नहीं। कल्टीवेटर, जैसे ₹21,000 वाला सोनालिका 9 टाइन, मिट्टी पलटे बिना भुरभुरी करता है और रोज़ की दूसरी जुताई का यंत्र है। डिस्क हैरो ठूँठ और ढेले काटता है, भारी या पराली वाली ज़मीन के लिए। रोटावेटर कई पास का काम एक में कर देता है और महीन बीज-क्यारी बनाता है, पर प्रति एकड़ डीज़ल ज़्यादा खाता है और बार-बार चलाने से नीचे सख्त तह बन सकती है।
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने पर रोक है, और उसकी जगह लेने वाली मशीनों से कमाई होती है। ₹1.58 लाख वाला दशमेश 610 हैप्पी सीडर धान की पराली में से गेहूँ बो देता है; शक्तिमान 8 जैसा सुपर सीडर बुआई के साथ पराली मिट्टी में मिला देता है। बेलर और स्ट्रॉ रीपर उसी पराली को बिकने वाला चारा बना देते हैं।
यंत्र का वज़न अपने ट्रैक्टर की लिफ्ट से मिलाएँ, ज़रूरी पीटीओ स्पीड पूछें, और यह भी कि ब्लेड, टाइन, डिस्क और शीयर बोल्ट पास में मिलते हैं या नहीं।
मॉडल के हिसाब से 45 से 65 एचपी। फील्डकिंग FKRTSG 175 के लिए 45 से 50 एचपी बताई गई है, जबकि भारी शक्तिमान RP 185 को 50 से 65 एचपी चाहिए। ट्रैक्टर 42 से 45 एचपी का हो तो 5 फुट वाला पास जल्दी पूरा करेगा और डीज़ल भी कम लेगा।
पहले कल्टीवेटर, फिर मिट्टी के हिसाब से एमबी हल या रोटावेटर। 9 टाइन कल्टीवेटर करीब ₹21,000 का आता है और पूरे सीज़न की दूसरी जुताई संभाल लेता है। ₹32,000 से ₹47,000 का एमबी हल गहरी जुताई करता है। रोटावेटर महँगा है पर कई पास एक में कर देता है, जो कम समय की बुआई में काम आता है।
कल्टीवेटर खिंचने वाला यंत्र है, जिसके टाइन मिट्टी पलटे बिना भुरभुरी करते हैं — सस्ता और कम डीज़ल वाला। रोटावेटर पीटीओ से चलता है, इसके घूमते ब्लेड मिट्टी काटकर मिलाते हैं और एक ही पास में बीज-क्यारी तैयार कर देते हैं। रोटावेटर समय बचाता है पर डीज़ल और पीटीओ पावर ज़्यादा माँगता है।
लगा तो सकते हैं, चलाना नहीं चाहिए। बड़ा यंत्र इंजन को उसकी काम करने वाली सीमा से नीचे खींच लेता है, क्लच गर्म करता है, काम धीमा करता है और कम आउटपुट में ज़्यादा डीज़ल जलाता है। यंत्र का वज़न लिफ्ट से ज़्यादा हो तो हाइड्रोलिक पर भी खतरा है।