ट्रैक्टर की कीमत सितंबर 2026 — सभी मॉडल, स्पेसिफिकेशन और रेटिंग

FY2025-26 में भारत ने एक साल में दस लाख ट्रैक्टर का आँकड़ा पार कर लिया — 11.6 लाख होलसेल डिस्पैच और FADA के अनुसार 10.5 लाख रिटेल रजिस्ट्रेशन, यानी करीब 23% की बढ़त। इनमें बड़ी मशीनें लगभग नहीं थीं। यहाँ बिकने वाले करीब 98% ट्रैक्टर 50 एचपी से नीचे हैं, और अकेला 41 से 50 एचपी बैंड बाज़ार का लगभग दो-तिहाई है। भारतीय खेती का ढाँचा यही है — पाँच से बीस एकड़, मिली-जुली फसलें, रोटावेटर, कल्टीवेटर, ट्रॉली और थ्रेशर। नीचे की लिस्टिंग में असली कीमत, पीटीओ एचपी और लिफ्ट क्षमता तीनों मिलेंगी।

37मॉडल
16ब्रांड
₹ 5.22 लाखशुरुआती कीमत

एचपी के अनुसार

ब्रांड के अनुसार

ट्रैक्टर — सभी मॉडल

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41 से 50 एचपी का दबदबा क्यों है

भारत के दो-तिहाई ट्रैक्टर खरीदार 41 से 50 एचपी में आते हैं, और यह फैशन नहीं है। लगभग 50 एचपी वह बिंदु है जहाँ ट्रैक्टर सूखी ठूँठ में 6 फुट रोटावेटर चला लेता है, काली मिट्टी में 9 टाइन कल्टीवेटर खींच लेता है, मल्टीक्रॉप थ्रेशर को स्थिर आरपीएम पर चलाता है और भरी 5 टन ट्रॉली मंडी तक ले जाता है — हर चढ़ाई पर गियर बदले बिना। 40 एचपी से नीचे इनमें से किसी न किसी में समझौता होगा। 55 एचपी से ऊपर आप उस क्षमता के पैसे दे रहे हैं जो 15 एकड़ की जोत इस्तेमाल ही नहीं करेगी, और डीज़ल भी ज़्यादा।

31 से 40 एचपी का हिस्सा घट रहा है क्योंकि किसान ऊपर चढ़ रहे हैं। वजह किराए का काम है। जो किसान रोटावेटर या थ्रेशर के काम पर ट्रैक्टर किराए पर देना चाहता है, उसे वह इम्प्लीमेंट क्षमता चाहिए जो 45 एचपी से ऊपर ही मिलती है।

असली आँकड़ा पीटीओ एचपी है

इंजन एचपी ट्रैक्टर बिकवाती है, काम पीटीओ एचपी करती है। ट्रांसमिशन का नुकसान हर कंपनी में अलग है। पावरट्रैक यूरो 50 में 50 रेटेड से 45.6 पीटीओ एचपी मिलती है, जबकि वीएसटी शक्ति 932 DI में 32 से सिर्फ 24। इम्प्लीमेंट पीटीओ के हिसाब से चुनें, बोनट पर लिखे नंबर से नहीं।

लिफ्ट क्षमता तय करती है कौन से यंत्र चलेंगे

हाइड्रोलिक लिफ्ट पर ही ज़्यादातर लोग धोखा खाते हैं। 1450 किलो लिफ्ट वाला 50 एचपी ट्रैक्टर और 2000 किलो लिफ्ट वाला 50 एचपी ट्रैक्टर एक चीज़ नहीं हैं। दूसरा माउंटेड डिस्क हैरो, भारी रोटरी टिलर या लेवलर फ्रेम उठा लेगा; पहला झुक जाएगा। पहले से यंत्र हों तो उनका वज़न देखकर ट्रैक्टर चुनें।

2WD या 4WD

भारत में बिकने वाले ज़्यादातर ट्रैक्टर 2WD हैं, और सूखी जुताई तथा ढुलाई के लिए यही सही है — सस्ता, सरल, कम मरम्मत। 4WD का पैसा गीले धान, ढलान वाली ज़मीन, बाग की सिंचित मिट्टी में लगातार मोड़ लेने और फ्रंट लोडर के काम में वसूल होता है।

खरीदने से पहले क्या देखें

वारंटी की अवधि और घंटे की सीमा लिखित में लें — इस बाज़ार में यह 1 साल से 6 साल तक जाती है और यह फर्क किसी भी एक्सेसरी से बड़ा है। पास की वर्कशॉप कहाँ है और वहाँ गियरबॉक्स तथा हाइड्रोलिक के पुर्ज़े मिलते हैं या नहीं, यह पहले पता कर लें।

ट्रैक्टर — राज्य के अनुसार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

10 एकड़ के लिए कितने एचपी का ट्रैक्टर चाहिए?

10 एकड़ की मिली-जुली खेती के लिए व्यावहारिक जवाब 45 से 50 एचपी है। इतने में 5 या 6 फुट रोटावेटर और थ्रेशर के लिए पर्याप्त पीटीओ पावर मिलती है, और 9 टाइन कल्टीवेटर तथा भरी ट्रॉली के लिए खिंचाव भी। 40 एचपी से नीचे काम धीमा होगा, 55 से ऊपर सिर्फ डीज़ल बढ़ेगा।

2026 में भारत का सबसे सस्ता ट्रैक्टर कौन सा है?

हमारी लिस्ट में कैप्टन 200 DI ₹2.94 लाख से और स्वराज 717 ₹3.19 लाख से शुरू होता है, दोनों 21 एचपी से कम के छोटे ट्रैक्टर हैं। मुख्यधारा के 40 एचपी वर्ग में सबसे सस्ता ACE DI 350 NG है, ₹5.22 लाख। तुलना हमेशा ऑन-रोड कीमत पर करें।

इंजन एचपी और पीटीओ एचपी में क्या फर्क है?

इंजन एचपी वह है जो मोटर बनाती है; पीटीओ एचपी वह है जो ट्रांसमिशन के नुकसान के बाद पीटीओ शाफ्ट तक पहुँचती है। यंत्र पीटीओ एचपी पर चलते हैं। नुकसान बहुत अलग-अलग होता है — पावरट्रैक यूरो 50 में करीब 4 एचपी, वीएसटी शक्ति 932 DI में 8 एचपी।

2WD लें या 4WD?

अगर काम सूखी जुताई, बुआई और ढुलाई का है तो 2WD लें — सस्ता, सरल और भारत की ज़्यादातर खेती इसी से चलती है। गीले धान के खेत, ढलान या पहाड़ी प्लॉट, बाग की नरम सिंचित कतारें और फ्रंट लोडर लगाना हो तो 4WD चुनें। बाकी हालात में यह पैसा वसूल नहीं होता।